अक्सर अंतरराष्ट्रीय ख़बरों में ईरान का ज़िक्र आता है, और कई बार यह सवाल मन में उठता है कि “क्या ईरान में चुनाव होता है?” इसका सीधा और सटीक जवाब है – हाँ, ईरान में चुनाव होते हैं। लेकिन वहां की राजनीतिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया दुनिया के अन्य आम लोकतांत्रिक देशों (जैसे भारत या अमेरिका) से काफी अलग है। ईरान एक ‘इस्लामिक गणराज्य’ (Islamic Republic) है, जहां लोकतांत्रिक ढांचे और धार्मिक नियमों का एक मिला-जुला सिस्टम काम करता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आइए इस ब्लॉग पोस्ट में ईरान की चुनाव प्रक्रिया को आसान भाषा में समझते हैं।
ईरान में किन पदों के लिए वोटिंग होती है?
ईरान में जनता मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण संस्थाओं के लिए सीधे तौर पर वोट डालती है:
1. राष्ट्रपति (President) ईरान में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा हर 4 साल में किया जाता है। राष्ट्रपति देश की सरकार का मुखिया होता है और आर्थिक मामलों को संभालता है। हालाँकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ईरान में राष्ट्रपति के पास देश की सर्वोच्च शक्तियां नहीं होती हैं।
2. संसद (Majlis / Parliament) ईरान की संसद को ‘मजलिस’ (Majlis) कहा जाता है। इसमें 290 सदस्य होते हैं, जिन्हें आम जनता 4 साल के कार्यकाल के लिए चुनती है। मजलिस का काम नए कानून बनाना और देश के बजट को पास करना है।
3. विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) यह 88 वरिष्ठ इस्लामी विद्वानों (Clerics) का एक बहुत ही शक्तिशाली समूह है। इस सभा के सदस्यों को जनता 8 साल के लिए चुनती है। इस सभा का सबसे बड़ा काम देश के ‘सर्वोच्च नेता’ (Supreme Leader) को चुनना है।
सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) कौन होता है?
ईरान में सबसे ज्यादा ताकत राष्ट्रपति या संसद के पास नहीं, बल्कि ‘सर्वोच्च नेता’ (Supreme Leader) के पास होती है। देश की सेना (Military), न्यायपालिका (Judiciary), और विदेशी मामलों की नीतियां सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता के नियंत्रण में होती हैं। सर्वोच्च नेता का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती, बल्कि ‘विशेषज्ञों की सभा’ द्वारा किया जाता है। वर्तमान में अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता हैं।
गार्जियन काउंसिल (Guardian Council): चुनाव की सबसे अहम कड़ी
ईरान के चुनावों को पूरी तरह समझने के लिए ‘गार्जियन काउंसिल’ की भूमिका जानना सबसे ज़रूरी है। यह 12 सदस्यों की एक समिति है (जिसमें 6 इस्लामी कानून के जानकार और 6 न्यायविद होते हैं)।
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उम्मीदवारों की जांच (Vetting Process): ईरान में कोई भी व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से सीधे चुनाव में खड़ा नहीं हो सकता। राष्ट्रपति या संसद का चुनाव लड़ने वाले हर व्यक्ति को पहले अपना नाम इस गार्जियन काउंसिल के पास भेजना होता है।
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काउंसिल यह तय करती है कि कौन सा उम्मीदवार चुनाव लड़ने योग्य है। अगर गार्जियन काउंसिल को लगता है कि कोई उम्मीदवार देश के इस्लामिक नियमों के खिलाफ है, तो उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता है।
ईरान में चुनाव एक नियमित प्रक्रिया है और वहां के नागरिक भारी संख्या में मतदान में हिस्सा भी लेते हैं। जनता अपने राष्ट्रपति और सांसदों को वोट देकर चुनती है। हालाँकि, गार्जियन काउंसिल द्वारा उम्मीदवारों की पहले से होने वाली सख्त छंटनी के कारण, चुनाव का ढांचा इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि सत्ता इस्लामिक गणराज्य के मूल सिद्धांतों और सर्वोच्च नेता के निर्देशों के दायरे में ही काम करे।


